प्रतिभा से बढ़कर और कोई समर्थता है नहीं। PRATIBHA SE BADHKAR OR KOI SAMARTHTA HAI NAHI ।
प्रतिभा से बढ़कर और कोई समर्थता है नहीं। PRATIBHA SE BADHKAR OR KOI SAMARTHTA HAI NAHI आदर्शवादी प्रयोजन,सुनियोजन, व्यवस्था और साहसभरी पुरुषार्थ परायणता को यदि मिला दिया जाए, तो उस गुलदस्ते का नाम प्रतिभा दिए जाने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कहते हैं कि सत्य में हजार हाथी के बराबर बल होता है।सच्चाई तो इस … Read more