शीतला सप्तमी: स्वास्थ्य और समृद्धि का त्योहार।
शीतला सप्तमी हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार माता शीतला की पूजा और आराधना के लिए समर्पित है, जो स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की देवी मानी जाती हैं।

🌿 शीतला सप्तमी 2025: तिथि, पूजा विधि और व्रत का महत्व – जानें क्यों मनाई जाती है शीतला माता की पूजा! 🌿
शीतला सप्तमी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला व्रत और पर्व है। यह पर्व शीतला माता को समर्पित होता है, जिन्हें रोग-निवारण और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है। शीतला सप्तमी के दिन व्रती लोग माता से परिवार के स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं द्वारा रखा जाता है और इसमें शीतला माता की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
अगर आप भी शीतला सप्तमी व्रत करने जा रहे हैं, तो इस लेख में जानिए पूजा विधि, महत्व, और प्रश्नों के उत्तर जो अक्सर लोगों के मन में आते हैं।
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शीतला सप्तमी का महत्व
शीतला सप्तमी का त्योहार माता शीतला की कृपा से स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो अपने परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए माता शीतला से प्रार्थना करती हैं।
शीतला सप्तमी की पूजा विधि
इस सप्तमी की पूजा विधि इस प्रकार है:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
माता शीतला की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें और उनकी पूजा करें।
माता शीतला को भोग लगाएं, जिसमें बासी भोजन शामिल हो।
माता शीतला की आरती करें और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करें।
शीतला सप्तमी के दिन कुछ विशेष बातें
इस दिन बासी भोजन खाना चाहिए, क्योंकि यह माता शीतला को प्रिय है।
इस दिन किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं करना चाहिए, जैसे कि विवाह, गृह प्रवेश आदि।
शीतला सप्तमी के दिन माता शीतला की पूजा करने से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह त्योहार हमें स्वास्थ्य और समृद्धि के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।
शीतला सप्तमी के दिन क्या करें और क्या न करें?
करें:
✔ सूर्योदय से पहले पूजा करें।
✔ माता को ठंडा भोजन ही अर्पित करें।
✔ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
न करें:
❌ आग जलाना वर्जित है।
❌ गर्म खाना खाने से बचें।
❌ झूठ बोलने या क्रोध करने से बचें।
शीतला माता की कृपा से मिलते हैं ये लाभ:
✅ बच्चों को बीमारियों से सुरक्षा
✅ परिवार में स्वास्थ्य और समृद्धि
✅ सौभाग्य और सुख-शांति
✅ त्वचा संबंधी रोगों से राहत
शीतला सप्तमी पूजा विधि (Step by Step)
1️⃣ व्रत की तैयारी
- षष्ठी तिथि के दिन (एक दिन पहले) भोजन बना लें।
- रोटी, पूड़ी, बेसन की सब्ज़ी, मीठा आदि पकवान तैयार करें।
- सप्तमी तिथि के दिन नया भोजन नहीं बनाते।
2️⃣ सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- बिना आग जलाए माता शीतला की पूजा करें।
- पूजा स्थल को साफ करके वहां मंडप बनाएं।
3️⃣ शीतला माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- हल्दी, रोली, अक्षत, पुष्प, और बासी भोजन का भोग चढ़ाएं।
- माता को दही, बासी रोटी, गुड़, और मीठे चावल का भोग विशेष रूप से प्रिय होता है।
4️⃣ कथा और आरती करें।
- शीतला माता व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- आरती करके प्रार्थना करें कि माता घर-परिवार की रक्षा करें।
निष्कर्ष
शीतला सप्तमी एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो माता शीतला की पूजा और आराधना के लिए समर्पित है। यह त्योहार हमें स्वास्थ्य और समृद्धि के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन माता शीतला की पूजा करने से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 1: शीतला सप्तमी पर बासी खाना क्यों खाते हैं?
👉 मान्यता है कि शीतला माता को गर्म चीजें और आग पसंद नहीं है। बासी भोजन का भोग लगाकर उन्हें शांत रखा जाता है, ताकि वे किसी पर भी रोग या विपत्ति ना डालें।
प्रश्न 2: क्या पुरुष भी शीतला सप्तमी का व्रत कर सकते हैं?
👉 हां, यह व्रत पुरुष और महिलाएं दोनों रख सकते हैं। लेकिन परंपरागत रूप से महिलाएं अधिक व्रत करती हैं।
प्रश्न 3: क्या इस दिन घर में खाना पकाया जाता है?
👉 नहीं, शीतला सप्तमी पर घर में आग नहीं जलाई जाती और नया भोजन नहीं पकाया जाता। एक दिन पहले तैयार भोजन ही खाया जाता है।
प्रश्न 4: शीतला माता का वाहन कौन सा है?
👉 शीतला माता का वाहन गधा माना जाता है। उनके हाथ में झाड़ू और नीम की डाली होती है, जिससे वे रोगों का निवारण करती हैं।
शीतला सप्तमी: स्वास्थ्य और समृद्धि का त्योहार।
बहुत खूब आपकी लिखी हुई इस पोस्ट के लिए